सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

वो लम्हें शायद याद ना हो...

वो पहली बार,
जब माँ  ने गले से लगाया,
वो लम्हा जब पापा ने गोद में उठाया,
वो पहली मासूम सी हँसी,
वो पहली नींद की झपकी,
दादी की प्यार भरी पप्पी,
वो पहले लड़खड़ाते से कदम,
वो अनबुझ पहेली सा बचपन...ढेर सारे खिलौने,
गुड्डों और गुड़ियों की दुनिया,
स्कूल में वो पहला दिन,
वो प्यारे पलछिन,
और भी ऐसा बहुत कुछ......इस ज़िन्दगी की आपाधापी से,
इन वाहनों के शोर से,
कहीं दूर, कहीं एकांत में,
आओ बैठें, समेटे उन लम्हों को,
वो लम्हे जो बीत गए....वो लम्हें जो शायद याद न हों......

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